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शिमला के संजौली-ढली बाईपास पर दरकी पहाड़ी, भारी मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचीं गाड़ियां

➤ शिमला के संजौली-ढली बाईपास पर बुधवार को अचानक पहाड़ी दरक गई, जिससे भारी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे

➤ हादसे के वक्त सड़क से गुजर रही गाड़ियां बाल-बाल बच गईं और गनीमत रही कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ

➤ घटना के तुरंत बाद मौके पर तैनात जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर ट्रैफिक बहाल कर दिया गया, हालांकि खतरा अभी भी बना हुआ है


हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मौसम के तेवर और भूस्खलन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार दोपहर करीब सवा तीन बजे शिमला के व्यस्त संजौली-ढली बाईपास पर एक बार फिर अचानक पहाड़ी दरक गई। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सीधे सड़क पर आ गिरे। इसी दौरान सड़क से गुजर रही कई गाड़ियां इस भयानक भूस्खलन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गईं। इस पूरी घटना का एक लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसा कितना खतरनाक हो सकता था।

घटना की सूचना मिलते ही तुरंत हरकत में आते हुए मौके पर निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीन को लगाया गया। प्रशासन और रेस्क्यू टीम की मुस्तैदी के चलते सड़क पर आए पत्थरों और मलबे को तुरंत हटाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद यातायात को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और राहगीरों की चिंता अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, क्योंकि दरकी हुई पहाड़ी से अभी भी लगातार छोटे-छोटे पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले चालकों में डर का माहौल है।

गौरलतब है कि इस बाईपास पर भूस्खलन की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले गत 18 जून को भी इसी ढली-संजौली बाईपास पर भारी पहाड़ी दरक गई थी। उस दौरान भी भारी चट्टानें, एक विशाल पेड़ और टनों मलबा सड़क पर आ जाने के कारण करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहा था। लगातार हो रहे इन भूस्खलनों ने शिमला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि बारिश या मौसम में बदलाव के साथ ही पहाड़ियों के दरकने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।